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एल्युमीनियम के निर्यात शुल्क को लेकर सरकार कर रही है विचार |

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  • एल्युमीनियम के निर्यात शुल्क को लेकर सरकार कर रही है विचार |
  • 27 Aug
  • 2019

एल्युमीनियम के निर्यात शुल्क को लेकर सरकार कर रही है विचार |


आज हम इस पोस्ट में एल्युमीनियम के निर्यात के बारे में जानेंगे  | विस्तारपूर्वक अवश्य पढ़ें|

भारत में जम्मू कश्मीर, मुंबई, कोल्हापुर, जबलपुर, रांची, सोनभद्र, बालाघाट तथा कटनी में बॉक्साईट के विशाल भंडार पाए जाते है| देश के एल्युमीनियम निर्यात ने पिछले वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल-सितंबर अवधि के दौरान 21 % की उछाल दर्ज की है| उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018 - 2019 की पहली छमाही में एल्युमीनियम खंडों का निर्यात मात्रा के हिसाब से 7,72,000 टन के स्तर पर पहुंच गया है| जो पिछले वर्ष की इस अवधि में 6,38,000 टन था। प्राथमिक उत्पादकों के इस निर्यात व्यापार से लगातार हो रहे निर्यात से बढ़ावा मिला |  
भारत का एल्युमीनियम का उत्पादन, वर्ष में सालाना आधार पर 21 फीसदी बढ़ा है|

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भारत में एल्युमीनियम  का पहला कारख़ाना 1937 मे जे.के. नगर में 'एल्युमीनियम  कार्पोरेशन ऑफ इण्डिया' के नाम से स्थापित किया गया, दूसरा कारख़ाना1938 में 'इण्डियन एल्युमीनियम  लिमिटेड' की चार शाखाओं में विभाजित-
•    झारखण्ड के मुरी
•    कर्नाटक के अलवाय
•    पश्चिम बंगाल के बेलूर
•    उड़ीसा के हीराकुंड में स्थापित की गयीं|
एल्युमीनियम  का तीसरा कारख़ाना 'हिन्दुस्तान एल्युमीनियम  कार्पोरेशन' (हिण्डाल्को), उत्तर प्रदेश के रेनूकुट नामक स्थान पर लगाया गया और चौथा कारख़ाना तमिलनाडु के मैटूर नामक स्थान पर 'मद्रास एल्युमीनियम  कं.' के नाम से खोला गया। इन कारखानों की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 4 लाख टन प्रतिवर्ष है|

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