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कैसे हुआ भारतीयों का फलों में आम इतना 'खास' निर्यात के लिए|

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  • कैसे हुआ भारतीयों का फलों में आम इतना 'खास' निर्यात के लिए|
  • 30 Aug
  • 2019

कैसे हुआ भारतीयों का फलों में आम इतना 'खास' निर्यात के लिए|

आम को फलों का राजा कहते हैं| इसका नाम सुनते ही सभी के मुंह में पानी आ जाता है| आम हमारे देश का राष्ट्रीय फल है। इसे सदियों से उगाया जाता है| यह हमारे जीवन से इस प्रकार जुड़ गया है कि उत्सवों और त्योहारों पर घर में आम की पत्तियों के बंदनवारों से सजाए जाने लगे| यज्ञ के लिए आम की पवित्र लकड़ी की समिधा बनाई जाने लगी|

अब यही भारतीय आम विदेशियों को भी ललचाने लगा है| आम के लिए विदेशी मुंहबोली कीमत देने के लिए तैयार हैं| एशिया, यूरोप, अमेरिका, अरब, अफ्रीका समेत 60 से ज्यादा देशों में आम की मांग तेजी से बढ़ी है|

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आम अब डॉलर, पाउंड और यूरो कमाने लगा है, इसलिए अब यह 'खास' हो गया है| पिछले वर्ष के आँकड़े की बात करें, तो 53,177.26 मैट्रिक टन आम का निर्यात कर 67.25 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 445.55 करोड़ रुपये कमाए थे| विदेशी बाजार में आम की मांग हर साल बढ़ती ही जा रही है, लेकिन हम उसकी पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं| इसका कारण है आम के पैदावार की मौसम पर निर्भरता|

 

दरअसल, थाईलैंड के आमों का उपभोग मुख्य रूप से चीन समेत तमाम पूर्वी देशों में हो रहा है| हमने पाया है कि उन्हें फाइबर वाला आम अधिक पसंद नहीं है| इसलिए हमने इन देशों के लिए कम फाइबर वाले आमों की प्रजातियों को बढ़ावा देने का फैसला किया है| एपीईडीए के डाटा के मुताबिक, जापान ने अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 के बीच 88 टन भारतीय आम का आयात किया था|

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