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फूलों का निर्यात- एक स्वर्णिम भविष्य |

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  • फूलों का निर्यात- एक स्वर्णिम भविष्य |
  • 14 Sep
  • 2019

फूलों का निर्यात- एक स्वर्णिम भविष्य |

भारत में कई कृषि – जलवायु क्षेत्र हैं जो नाजुक और कोमल फूलों की खेती के लिए अनुकूल है।
भारतीय फूल उद्योग में गुलाब, रजनीगंधा, ग्लेड्स, एंथुरियम, कार्नेशन, गेंदा आदि फूल शामिल है। फूलों की खेती अत्याधुनिक पॉली और ग्रीनहाउस दोनों तरह की स्थितियों में की जाती है।

विस्तार से पढ़ें

 वर्ष 2015-16 के दौरान, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय पुष्पकृषि डेटाबेस के अनुसार भारत में फूलों की खेती के लिए 249 हज़ार हेक्टयर क्षेत्र था जिसमें से शिथिल फूलों उत्पाद 1,659 मिलियन टन हुआ तथा खुले फूलों का उत्पाद 484 हजार टन हुआ। फूलों की खेती कई राज्यों में व्यावसायिक रूप से की जा रही है और मध्य प्रदेश, मिजोरम, गुजरात, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, हरियाणा, असम और छत्तीसगढ़ को पीछे छोड़ते हुए तमिलनाडु (20%), कर्नाटक (13.5%), पश्चिम बंगाल (12.2%) राज्यों में फूलों की खेती की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

भारत में वर्ष 2018 -19 में फूलों का कुल निर्यात 571.38 करोड़ रुपए / 81.94 मिलियन अमरीकी डॉलर का रहा। प्रमुख आयातक देश संयुक्त राज्य अमरीका, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, और संयुक्त अरब अमीरात थे। भारत में 300 से अधिक निर्यातोन्मुख इकाईयाँ है। फूलों की 50% से अधिक इकाईयां कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में है। विदेशी कम्पनियों से तकनीकी सहयोग के साथ भारतीय पुष्पकृषि उद्योग विश्व व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की और अग्रसर है।

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